अल्मोड़ा:- राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय – बासोट ,क्षेत्र- भिकियासैंण में मनाया गया औड़ दिवस

राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय – बासोट ,क्षेत्र- भिकियासैंण (अल्मोड़ा) में वनाग्नि की घटनाओं को कम करने के लिए व वनाग्नि की घटनाओं के कारण व वनाग्नि पर कैसे नियंत्रण पाया जा सकता है, इस विषय पर जनजागरूकता के माध्यम से हम कैसे वनाग्नि की घटनाओं को रोक सकते है के संबंध में 01अप्रैल, 2026 को औंड़ दिवस का आयोजन किया गया। इस संबंध में औंड़ दिवस पर मंचस्थ अतिथि बीना देवी व दीपा देवी द्वारा बच्चों को वनाग्नि की घटनाओं को कम करने व जनजागरूकता के माध्यम से वनों के संरक्षण किये जाने की सोच के साथ औंड़ दिवस मनाये जाने की सार्थकता पर विस्तार से अपनी बात साझा की। वनाग्नि से होने वाले नुकसान पर भी मंचस्थ अतिथियों द्वारा अपनी बात को प्रमुखता से रखा। वनाग्नि के कारणों व इससे होने वाले नुकसान पर भी सोम्या, गीता कुमारी, आरुष, मोहित, गायत्री, दक्ष गोस्वामी, हर्षित, दीपिका, आर्यन ने अपनी बात को साझा किया। उन्होंने वनाग्नि के मुख्य कारणों में राहगीरों द्वारा जलती माचिस की तीली, जली हुयी बीड़ी को घास में फेंक देने व बरातों में बम, पटाखे फोड़ने से भी आग लगना बताया। शिक्षिका ज्योति गोस्वामी द्वारा वनाग्नि से होने वाले नुकसान के प्रति बच्चों को सचेत किया। वनाग्नि को रोकने में हम अपने स्तर से क्या कर सकते हैं इस पर बच्चों को जानकारी दी गयी। शिक्षक ताजदार अंसारी ,कृपाल सिंह शीला व बलवीर सिंह जी द्वारा भी औंड़ दिवस के माध्यम से समाज में जनजागरूकता फैलाये जाने के लिए सरकार व शिक्षा विभाग की पहल को स्वागत योग्य कदम बताया। वनों की सभी जीवों के लिए उपयोगिता से बच्चों को सरल शब्दों में उपयोगी जानकारी प्रदान की गयी। विद्यालय के प्रधानाध्यापक डी.एस.गिरी जी द्वारा बच्चों को जनजागरूकता फैलाने में बच्चों को पोस्टमैन की संज्ञा दी। जिस प्रकार पोस्टमैन लोगों तक कुशल संदेश पहुँचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उसी प्रकार बच्चे भी वनों को वनाग्नि की घटनाओं से बचाने के लिए समाज में जनजागरुकता फैलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सभी जीवों के लिए वनों को बचाया जाना आवश्यक हैं। हरे – भरे वृक्षों से ही से ही सभी जीवों को प्राणवायु ऑक्सीजन के साथ जीवन जीने को विभिन्न खाद्य पदार्थ व उपयोगी सामग्री प्राप्त होती है। औंड़ दिवस पर सभी बच्चों द्वारा सक्रिय प्रतिभागिता की गयी व वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए अपने स्तर से किये जा सकने वाले प्रयासों को पर्यावरण हित, समस्त जैव समुदाय हित में करने का संकल्प लिया। औंड़ दिवस का संचालन विज्ञान शिक्षक कृपाल सिंह शीला द्वारा किया गया।

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