
देहरादून| राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीआरटी) की किताबें भी अब गढ़वाली और कुमाऊंनी में मिलेंगी| उत्तराखंड में यह व्यवस्था पहली से चौथी कक्षा तक के छात्रों के लिए लागू होगी| नन्हे छात्रों को उनकी बोली भाषा में पढ़ने सीखने के लिए एनसीईआरटी ने बरखा श्रंखला की किताबों का अनुवाद शुरू कर दिया है| नए शैक्षिक सत्र में यह व्यवस्था लागू हो जाएगी| इन किताबों के अनुवाद के लिए गढ़वाली और कुमाऊंनी के 20 शिक्षकों का चयन किया गया है| जिसमें अजीम प्रेजी फाउंडेशन के 2 प्रतिनिधि भी शामिल है| सर्व शिक्षा अभियान की ओपीडी डॉक्टर मुकुल कुमार सती के मुताबिक एनसीईआरटी ने सभी राज्यों को बरखा किताबों को स्थानीय बोली भाषा में अनुवाद करने को कहा है| यह व्यवस्था का फायदा छात्रों को होगा जिससे वह अपनी बोली भाषा में किताबें होने के कारण आसानी से समझेंगे| राज्य में दोनों भाषाओं के 10-10 शिक्षकों को चुना गया है| अनुवाद के साथ ही 100 छोटे-छोटे वीडियो भी तैयार किए जा रहे हैं| डॉ मुकुल कुमार सती (एपीडी एसएसए) ने कहा कि नए शिक्षा सत्र से पहले स्कूलों में गढ़वाली और कुमाऊंनी में अनुवाद की गई किताबें मुहैया करा दी जाएंगी| चयनित शिक्षकों की 6 दिन की विशेष कार्यशाला में शिक्षकों को अनुवाद का प्रशिक्षण दिया जा रहा है|

