Uttarakhand- राज्य के गांव में पलायन की ऐसी मार कि ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए भी नहीं बचे प्रतिनिधि

उत्तराखंड राज्य के कई गांव में पलायन के चलते उन गांवों का अच्छे से विकास नहीं हो पाता है और आज हम उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रोपा और सीम गांव की बात करें तो इन दोनों ही गांव में पलायन के चलते ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए भी कोई प्रतिनिधि नहीं बचा है। दरअसल मामला यह है कि इन गांव में ग्राम प्रधान की सीट अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित है और गांव के पढ़े लिखे नौजवान काम की तलाश में पलायन कर चुके हैं तथा बचे हुए बुजुर्गों को ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने में कोई इच्छा नहीं रही है। और इसका परिणाम यह है कि बीते 3 साल से इन गांव में ग्राम प्रधान का चुनाव नहीं हो पाया है जिस कारण गांव का विकास भी नहीं हो पा रहा है। तथा गांव में पेयजल आदि की समस्याएं बनी हुई हैं। गांव में ग्राम प्रधान ना होने के कारण गांव के विकास के लिए जितना भी बजट आता है वह अच्छे से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है गांव वालों का कहना है कि कोई अच्छा जनप्रतिनिधि होता तो वे सांसद और उच्च अधिकारियों से मिलकर गांव का विकास करता मगर गांव में प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए भी कोई प्रतिनिधि बचा ही नहीं है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि उत्तराखंड के गांव पलायन की मार से ही दब चुके हैं।