
प्रस्तुति -रिपोर्टर कुर्मांचल हिन्दी अखबार नेहा भण्डारी
अड़कसी उठणै मिकैं पीड़
अड़कसी उठणै मिकै पीड़
बड़ि मसि-मसि जैसि लागि रै।
देखणी सबुकैं,बुलाणी सबुहै
बड़ी कचि-कचि जसि लागि रै।
कहां जाणी के सोचणी हम
बड़ी कसिकसी जसि लागि रै।
लेखणी,देखणी उनू सबुकैं
पै के करछा बड़ी पचपची लागि रै।
हम लै हयीं नानतिन
हमुल लै करि ग्वाव खेल।
करि खेलकूद,करौ खूब उजाड़
तब भौत भल लागछि
भै-बैणी झकड़ मै-बापूक दगाड़।
जाड़ोंक दिनों में रातहैं
स्कूलक काम करि बेर।
पै सुणाछि ईज आंण-काथ
भुटि भट्ट,ग्यू,चुस्की लिबेर।
ईजक आंण काथों में
नि लागछि पत्त कभै नींन ऐ कबेर।
कां हराणी वुं दिन
पत्त नि लाग पड़ि बर्षों हेरफेर।
आजाक नानतिन कैद जांस है गी
ग्वाव खेल सब हरै गीं देर सबेर।
मेल -मिलाप सब गायब हैगो
मोबाईल सब दिखै दिणौ खोलिबेर।
मै,बापूक मौज है रीं
सपडि जालि औलाद हमरि कबेर।
नाटकीय पन है गे उनरि दुनि
संस्कारों आपुणि बोलि है हटि बेर।
यस्सै जांस हाल बखतांक रौला
पत्त नि लागौ कां सटकि औलाद कबेर।
आई लै समई जाओ धैं
नई पीढी हाल देखि बेर।
आपुणी मै-बाप आपुणि थात
आपुणि भाषा,संस्कार देखिबेर।
अड़कसी पीड़ उठण लागि रै।
आधिल है कां जाणीं हम कबेर।

