
उत्तराखंड राज्य में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों द्वारा लंबी गर्दन वाले शाकाहारी डिक्रियोंसारिड और डायनासोर के सबसे पुराने जीवाश्म के अवशेषों की खोज जैसलमेर से की गई है। वैज्ञानिकों ने इसे थारूसारस इंडिकस नाम दिया है इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यह जीवाश्म लगभग 167 मिलियन वर्ष पुराना है। आईआईटी रुड़की के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुनील बाजपेई के अनुसार इस जीवाश्म के अध्ययन से पता चला है कि डायनासोर की उत्पत्ति भारत में हुई है जिसके बाद वह चीन और अन्य देशों में फैला। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स नेचर में प्रकाशित हुआ है। जीवाश्म 167 मिलियन पुराना है हालांकि अभी तक इसकी प्रजाति का पता नहीं चल पाया है। मरुस्थल में मिलने के कारण इसका नाम थारूसारस इंडिकस रखा गया है और यह थार मरुस्थल का पहला नाम है। बता दे कि इस प्रकार के जीवाश्म दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका और चीन में पाए गए थे लेकिन भारत में अभी तक ऐसे जीवाश्म ज्ञात नहीं थे मगर अब वैज्ञानिकों ने इसे खोज निकाला है और वैज्ञानिकों द्वारा दावा किया गया है कि डायनासोर की उत्पत्ति सबसे पहले भारत में हुई थी।

