
आज दिनांक 22 जुलाई 2023 को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संस्कृत शिक्षा से जुड़े , उत्तराखंड राज्य की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के समुपासक प्रदेश भर के विभिन्न सङ्गठन प्रमुखों की एक आवश्यक बैठक संस्कृत एकता मंच के तत्वाधान में सम्पन्न हुई।
सर्वविदित है कि वर्ष 2010 में राज्य सरकार ने देवभूमि उत्तराखण्ड नाम की सार्थकता हेतु देववाणी संस्कृत को राज्य की द्वितीय भाषा का गौरव प्रदान करने विधेयक पारित किया गया। उसके बाद उत्तराखंड राज्य में संस्कृत विभाग , संस्कृत निदेशालय विश्वविद्यालय , संस्कृत अकादमी आदि संस्थान अस्तित्व में आए । किन्तु वर्ष 2013 में तत्कालीन सरकार ने राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में न्यून छात्र संख्या का हवाला देते हुए एलटी संवर्ग के 2600 पदों को सरप्लस की कार्यवाही के तहत समाप्त कर दिया।इससे विद्यालयोँ में सभी विषयों के दो में से एक – एक पद के साथ ही भाषा हिन्दी और संस्कृत के दो में से एक पद को समाप्त कर दिया गया। तब से 95% माध्यमिक विद्यालयों हाई स्कूल और इण्टर कॉलेजों में संस्कृत शिक्षण की व्यवस्था असंगत विषयों के अध्यापकों के भरोसे चल रही है। विषयाध्यापकों के अभाव में कला – व्यायाम – विज्ञान – गणित के अध्यापकों के द्वारा कामचलाऊ तौर पर संस्कृत भाषा पढ़ाई जाने से छात्रों के लिए विषय नीरस और अरुचिकर बनते जा रहा है और उच्च शिक्षा में भी छात्र- छात्राएं संस्कृत विषय लेने से कतरा रहे हैं।
द्वितीय राजभाषा संस्कृत शिक्षण की स्थिति माध्यमिक विद्यालयों में ही नहीं राज्य के परम्परागत संस्कृत विद्यालयोँ और महाविद्यालयों में भी बड़ी दयनीय बनी हुई है।वहाँ भी संस्कृत विद्यालयोँ और महाविद्यालयों में भी शिक्षकों की भर्ती ही नहीं हो रही है।
इसके लिए उत्तराखण्ड हिन्दी-संस्कृत शिक्षण मञ्च के संयोजक बालादत्त शर्मा , संरक्षक पी0सी0 तिवारी,उत्तराखंड संस्कृत विद्यालय/महाविद्यालय प्रबंधकीय शिक्षक संघ (155) के अध्यक्ष डॉ0 जनार्दन कैरवान , मन्त्री- नवीन पन्त, उत्तराखंड संस्कृत विद्यालय/महाविद्यालय प्रबंधकीय शिक्षक संघ (126)के अध्यक्ष भगवती प्रसाद बिजल्वाण , मन्त्री रावेन्द्र कुमार , संस्कृत छात्र सेवा समिति के अध्यक्ष सर्वेश तिवारी, मन्त्री विनोद कुमार , उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष सागर खेमरिया ,छात्रसंघ सचिव गिरीश सती , भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय – हरिद्वार के अध्यक्ष नितिन लोहनी , उत्तराखंड हिन्दी-संस्कृत शिक्षण मञ्च के डॉ0 हरिशंकर डिमरी , डॉ0 दीपक नवानी , ऋषिराम बहुगुणा , अर्जुन पाण्डेय , दीपचन्द्र जोशी अनिल ढौडियाल आदि ने एकतामन्च के रूप में संगठित होकर भारतीय संस्कृति की मूल संस्कृत भाषा से सम्बन्धित समस्याओं के निराकरण हेतु उत्तराखंड संस्कृत भारती के प्रान्त सङ्गठन मन्त्री गौरव शास्त्री के साथ मिलकर परिचर्चा की और समस्याओं के विषय में उत्तराखंड सरकार को एक मांगपत्र सौंपते हुए दिसम्बर तक चरणबद्ध तरीके से राजकीय और अशासकीय /प्रबंधकीय माध्यमिक विद्यालयोँ में संस्कृत शिक्षकों के पदसृजन एवं संस्कृत विद्यालय / महाविद्यालयों मे 155 शिक्षकों की तदर्थ नियुक्ति तथा 126 शिक्षकों को मानदेय मे शामिल करने की बात कही। बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि अन्यथा की स्थिति में जनवरी 2024 प्रथम सप्ताह में संस्कृत एकता मञ्च देहरादून में आंदोलन करते हुए विधानसभा कूच करेगा।
बैठक को उत्तराँचलम् संस्कृत भारती के प्रान्त सङ्गठन मन्त्री गौरव शास्त्री ने उत्तराखण्ड हिन्दी-संस्कृत शिक्षण मञ्च के संयोजक बालादत्त शर्मा , पी सी तिवारी , डॉ0 हेमन्त जोशी, उत्तराखंड संस्कृत विद्यालय / महाविद्यालय प्रबंधकीय शिक्षक संघ ( 155 , 126 ) के मन्त्री नवीन पन्त , अध्यक्ष भगवती प्रसाद , छात्र समिति के विनोद कुमार , छात्र परिषद के नितिन लोहनी ने सम्बोधित किया।
वक्ताओं ने राज्य के राजकीय और अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में संस्कृत शिक्षण के लिए एल टी और प्रवक्ता संवर्ग में नियुक्तियाँ करने , प्रबंधकीय संस्कृत विद्यालयोँ में संस्कृत भाषा के पठन – पाठन के लिए शिक्षकों की नियुक्ति करने , माध्यमिक शिक्षा विभाग में संस्कृत भाषा को त्रिभाषा सूत्र (हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत) के रूप में सभी संकायों में अनिवार्य विषय के रूप में पाठ्यक्रम में लागू करने, सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में संस्कृत भाषा का एक अनिवार्य प्रश्नपत्र निर्धारित करने और सचिवालय में संस्कृत भाषा अनुवादकों की नियुक्ति करते हुए द्वितीय राजभाषा संस्कृत की सार्थकता की मांग सरकार से की है।इस विषय में शीघ्र एक बैठक भौतिक रूप से आहूत की जानी प्रस्तावित है।

