
उत्तराखंड राज्य के नैनीताल में स्थित हाईकोर्ट ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा है कि कितने लोगों को ऐसी सुविधा दी गई है। बता दें कि हरिद्वार जिले के खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक उमेश शर्मा को वाई प्लस सुरक्षा दिए जाने के विरुद्ध दायर की गई जनहित याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की और इस दौरान राज्य सरकार से सवाल पूछा है कि ऐसे कितने लोगों को सुरक्षा प्रदान की गई है और कितने ऐसे लोग हैं जिन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और सरकार द्वारा उनको सुरक्षा दी गई हैं तथा कोर्ट की ओर से सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि जुलाई के दूसरे सप्ताह तक कोर्ट में इसका पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत करें। पूर्व में भी कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि पुलिस का कार्य जनता की सुरक्षा करना है जिन लोगों को जान- माल का खतरा है जांच उपरांत उनको सुरक्षा मुहैया कराई जाए। जनहित याचिका में कहा गया था कि विधायकों की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षाकर्मी दिया जाता है यदि किसी विधायक को खतरा है तो उन्हें एक अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी दिया जाता है। किसी विधायक को सुरक्षा कवच देने से पहले एलआईयू की रिपोर्ट विभाग को दी जाती है जबकि विधायक उमेश शर्मा को सुरक्षा देते वक्त अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का पालन किया बिना उनके प्रार्थना पत्र के आधार पर उन्हें वाई प्लस की सुरक्षा प्रदान की है यही नहीं बल्कि उनके पास अपनी पर्सनल एस्कॉर्ट भी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि स्थानीय खुफिया इकाई ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उनके जीवन को कोई खतरा नहीं है इसलिए उनकी वाई प्लस की सुरक्षा हटाई जाए। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से सवाल पूछा है और जुलाई के दूसरे सप्ताह तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

