
उत्तराखंड राज्य में ग्लेशियर टूटने को लेकर बड़ा खतरा सामने आया है। बता दें कि पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूट रहे हैं और यह टूटते ग्लेशियर वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती के साथ स्थानीय आबादी के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आए हैं। हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर खतरनाक रूप से कम हो रहे हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार ग्लेशियर टूटने की मुख्य वजह ग्लोबल वार्मिंग है। हिमालय श्रृंखला एक व्यापक पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र है जो ग्लोबल वार्मिंग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। बता दें कि ट्रांस हिमालय जो कि तिब्बती पठार के दक्षिणी किनारे पर स्थित है वह बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। मानव निर्मित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन आल्स- एंडीज के साथ ही पृथ्वी के अन्य बर्फ आधारित क्षेत्रों के ग्लेशियरों का पिघलने का प्रमुख कारण बन चुके हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत पिथौरागढ़ जिले का हिमालयी क्षेत्र ग्लोबल वार्मिंग से बच नहीं पा रहा है। बता दें कि कुमाऊं विश्वविद्यालय भूगोल विभाग डीएसबी परिसर के डॉक्टर देवेंद्र सिंह परिहार के द्वारा पिथौरागढ़ जिले में गोरी गंगा क्षेत्र के ग्लेशियरों का व्यापक अध्ययन किया गया। 2017 से 2022 तक किए गए इस अध्ययन उन्होंने बताया कि ग्लेशियर पिघलने व हिमखंड टूटने की मुख्य वजह मानवीय गतिविधियां हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ता परिवहन, वनों की कटाई, बड़ी मात्रा में जीवाश्म का जलना इससे ग्लेशियर टूट रहे हैं और 2017 से 2022 तक किए गए अध्ययन के दौरान पता चला है कि ग्लेशियर पिघलने से वहां पर 77 झीलें बन गई हैं।

